राम गुणों के सागर हैं , मर्यादा के पालक हैं। राम गुणों के सागर हैं , मर्यादा के पालक हैं।
पद्मनी के जौहर से निकला मैं निडर निर्भीक राजपूत हूं। पद्मनी के जौहर से निकला मैं निडर निर्भीक राजपूत हूं।
वृत्त की परिधि में बैठे हैंदो शत्रु , विनाशक हाथ मिलाकरएक बहलाकर लूटता हैदूसरा खुलेआम घात लगाकर । वृत्त की परिधि में बैठे हैंदो शत्रु , विनाशक हाथ मिलाकरएक बहलाकर लूटता हैदूसरा ख...
जरूरत पड़े या ना पड़े हर वक्त तैयार रहना चाहिए। जरूरत पड़े या ना पड़े हर वक्त तैयार रहना चाहिए।
हर शब्द को निशब्द कर दे ऐसी लड़ी थी, लगता है जैसे शत्रु रक्त की प्यास बड़ी थी। हर शब्द को निशब्द कर दे ऐसी लड़ी थी, लगता है जैसे शत्रु रक्त की प्यास बड़ी ...
फूट लड़ाई अब बस हो एक-एक एकादश हो। फूट लड़ाई अब बस हो एक-एक एकादश हो।